भारत का स्टील सेक्टर दुनिया में दूसरे नंबर पर है और 2025 में कच्चे स्टील का उत्पादन 152 मिलियन टन तक पहुँच गया है, जो पिछले साल की तुलना में 6% अधिक है। घरेलू स्टील की खपत भी 137.8 मिलियन टन पर पहुँच गई है, जो 11.3% की मजबूत वृद्धि दर्शाती है। इसी ग्रोथ ट्रेंड में बंसल वायर इंडस्ट्रीज (Bansal Wire Industries) भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रही है।

बंसल वायर का स्टॉक क्यों चर्चा में है?
बंसल वायर इंडस्ट्रीज लिमिटेड का स्टॉक ₹413 के स्तर पर ट्रेड कर रहा है और कंपनी ने हाल ही में अपने Q4FY25 के नतीजे जारी किए हैं, जो काफी अच्छे रहे हैं। यह कंपनी मुख्य रूप से हाई कार्बन स्टील वायर, माइल्ड स्टील वायर और स्टेनलेस स्टील वायर का उत्पादन करती है, जिनका उपयोग ऑटोमोटिव, इंफ्रास्ट्रक्चर और इंजीनियरिंग सेक्टर में होता है।
बंसल वायर की फाइनेंशियल परफॉर्मेंस
बंसल वायर ने पिछले वित्तीय वर्ष में मजबूत वृद्धि दर्ज की है:
- रेवेन्यू में 57% की वृद्धि (Q4FY24: ₹571 करोड़ से Q4FY25: ₹897 करोड़)
- नेट प्रॉफिट में 50% की वृद्धि (Q4FY24: ₹20 करोड़ से Q4FY25: ₹30 करोड़)
यह वृद्धि कंपनी के कैपेसिटी एक्सपेंशन और मार्केट डिमांड में बढ़ोतरी के कारण हुई है।
कैपेसिटी एक्सपेंशन
बंसल वायर अपने उत्पादन क्षमता को बढ़ाने पर फोकस कर रही है:
- दादरी प्लांट में 300 किलो टन क्षमता का टारगेट।
- 120 किलो टन की अतिरिक्त क्षमता H1FY26 तक जोड़ी जाएगी।
- हर 6 महीने में ₹300 करोड़ का निवेश किया जाएगा।
इस एक्सपेंशन से कंपनी को भविष्य में और बेहतर परफॉर्मेंस देखने को मिल सकती है।
हाई-मार्जिन प्रोडक्ट्स पर फोकस
कंपनी अब स्पेशलिटी वायर (जैसे स्टील कॉर्ड, इंडस्ट्रियल वायर) पर ज्यादा ध्यान दे रही है, जिनसे मार्जिन अधिक मिलता है।
- वर्तमान में कंपनी का मार्केट शेयर 6% है, जिसे 2028 तक 10% करने का लक्ष्य है।
- हाई-मार्जिन प्रोडक्ट्स से 20-25% रेवेन्यू आने की उम्मीद है।
इससे कंपनी की EBITDA प्रति टन ₹6,500 से बढ़कर ₹8,000-9,000 तक पहुँच सकती है।
ऑटो और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर से सपोर्ट
बंसल वायर का मुख्य बिजनेस ऑटोमोटिव सेक्टर से आता है, जिसमें भारत में लगातार ग्रोथ देखने को मिल रही है। इसके अलावा, सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स (हाइवे, रेलवे) और इंजीनियरिंग सेक्टर में भी डिमांड बढ़ रही है, जो कंपनी के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।
निष्कर्ष
बंसल वायर इंडस्ट्रीज में ग्रोथ के कई पॉजिटिव फैक्टर्स हैं:
- मजबूत रेवेन्यू और प्रॉफिट ग्रोथ
- कैपेसिटी बढ़ाने की योजना
- हाई-मार्जिन प्रोडक्ट्स पर फोकस
- ऑटो और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर का सपोर्ट
हालाँकि, स्टॉक मार्केट में हमेशा रिस्क रहता है, इसलिए निवेश से पहले अपना रिसर्च जरूर करें।








