इंजीनियरिंग और कंस्ट्रक्शन की दुनिया में Larsen & Toubro (L&T) ने एक बार फिर अपना जलवा दिखाया है। कंपनी को अपनी Hydrocarbon Offshore डिवीजन के ज़रिए मिडिल ईस्ट के एक प्रतिष्ठित क्लाइंट से ₹15,000 करोड़ से ज़्यादा का ऑर्डर मिला है। ये प्रोजेक्ट कंपनी के इतिहास में एक और माइलस्टोन है।

ऑफशोर प्रोजेक्ट
इस अल्ट्रा-मेगा ऑर्डर के तहत कंपनी को करना है:
- इंजीनियरिंग
- प्रोक्योरमेंट (खरीददारी)
- कंस्ट्रक्शन और इंस्टॉलेशन
- और मौजूदा ऑफशोर सुविधाओं का अपग्रेडेशन
यानि यह एक EPCIC (Engineering, Procurement, Construction, Installation & Commissioning) पैकेज है – जिसमें हर छोटी-बड़ी चीज़ की ज़िम्मेदारी कंपनी की है। और L&T की यही खासियत है – बड़े, जटिल प्रोजेक्ट्स को समय पर और सुरक्षा के साथ पूरा करना।
शेयरों में हलचल
मंगलवार को कंपनी का शेयर 0.4% बढ़कर ₹3,437.95 तक पहुंचा, जबकि पिछला क्लोज ₹3,422.20 था। कंपनी की मार्केट कैप अब ₹4.73 लाख करोड़ से ऊपर है, जो इसे बड़े और भरोसेमंद प्लेयर्स की लिस्ट में रखता है।
ताज़ा नतीजे
Q4FY25 में कंपनी का प्रदर्शन कुछ इस तरह रहा:
- राजस्व: ₹75,527 करोड़ (पिछले साल से 10.8% ज़्यादा)
- नेट प्रॉफिट: ₹5,497.26 करोड़
इसी तिमाही में कंपनी को कुल ₹89,600 करोड़ के नए ऑर्डर मिले:
- इंफ्रास्ट्रक्चर: 39%
- एनर्जी: 36%
- सर्विसेज: 20%
- हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग और अन्य: 6%
कंपनी की कुल ऑर्डर बुक में अब इंफ्रास्ट्रक्चर का हिस्सा 62% है, जिससे साफ होता है कि यही L&T की सबसे बड़ी ताकत है।
हाइड्रोकार्बन ऑफशोर
Offshore ऑयल और गैस सेक्टर में L&T की Hydrocarbon डिवीजन पूरी दुनिया में जानी जाती है। कंपनी के पास है:
- एडवांस इंजीनियरिंग की टीम
- फैब्रिकेशन यार्ड्स
- खुद की मरीन वेसल्स की फ्लीट
चाहे shallow-water हो या deep-sea, L&T हर जगह अपने EPCIC सॉल्यूशन्स के लिए पहचानी जाती है।
कंपनी की पहचान
1938 में बनी इस कंपनी ने कई दशकों में खुद को इंफ्रास्ट्रक्चर, एनर्जी, डिफेंस, आईटी सर्विसेज और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में फैलाया है। इनकी कस्टमर-सेंट्रिक अप्रोच, टेक्नोलॉजी पर पकड़ और क्वालिटी के लिए प्रतिबद्धता ने इसे दुनिया की सबसे भरोसेमंद इंजीनियरिंग कंपनियों में शामिल कर दिया है।
निष्कर्ष
L&T को मिला ये ₹15,000+ करोड़ का अल्ट्रा-मेगा ऑर्डर सिर्फ एक कॉन्ट्रैक्ट नहीं है, बल्कि ये एक इंटरनेशनल विश्वास की मोहर है। कंपनी ने फिर साबित कर दिया कि वह मेगा-प्रोजेक्ट्स को हैंडल करने में माहिर है, और ये उसके 80 साल के अनुभव का नतीजा है।









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